क्लासिकल होम्योपैथी और मैं


मैं डॉक्टर सच्चिदानंद श्रीवास्तव अपने वेबसाइट क्लासिकल होम्योपैथी में आपका स्वागत करता हूं।मैं पिछले लगभग 18 साल से क्लासिकल होम्योपैथी का अनवरत प्रयोग और अध्ययन कर रहा हूं। क्लासिकल होम्योपैथी वह होम्योपैथिक प्रैक्टिस है जिसमें चिकित्सक होम्योपैथी के गूढ़ सिद्धांतों का प्रयोग करके अपने रोगी के लिए चुनिंदा औषधि का चुनाव करता है । फरवरी सन् 2002 की घटना है , पटना के प्रसिद्ध अन्तर्राष्ट्रीय होमियोपैथिक चिकित्सक डा0 रामजी सिंह ने एक अन्तर्राष्ट्रीय होमियोपैथिक सेमिनार का आयोजन किया था , उस सेमिनार में मुझे भी जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । सेमिनार में उस समय के तत्कालीन लिविंग हैनीमन डाक्टर एस.के. दूबे का सत्र चल रहा था । सेमिनार में दक्षिण एशिया  के 10 देशों के डॉक्टर्स पधारे हुए थे । डॉक्टर्स ने डॉ. एस.के. दूबे से पूछा कि सर होम्योपैथिक डॉक्टर बहुत गरीब होता है उसे अपनी गरीबी दूर करने के लिए क्या करना चाहिए ? इस प्रश्न पर डॉ. एस.के. दूबे ने डॉक्टरों से कहा कि ….. you are smuggler of diamonds not Homoeopathic Physician……. डा.दूबे की इस बात पर सेमिनार हाल में पूरा सन्नाटा छा गया ,उन्हें बात ही समझ में नहीं आ रही थी कि आखिरकार इसका मतलब क्या हुआ तब डॉ. एस.के. दूबे ने इसको एक्सप्लेन किया और समझाया कि यह जो होम्योपैथी की सफेद- सफेद गोलियां हैं वह सिर्फ शुगर ऑफ मिल्क या मात्र चीनी की गोलियां नहीं है वह एक- एक होमियोपैथी की गोली हीरे के टुकड़े हैं तुमको करना सिर्फ इतना है कि उन हीरे के टुकड़ों को तराशो और उस अनमोल हीरे रूपी होमियोपैथिक रेमिडी को अपने उस रोगी के लिए निकालो जो किसी रोग से ग्रस्त होकर तुम्हारे पास आया है, उसके लिए तुमको अथक परिश्रम करनी पड़ेगी साधना करनी पड़ेगी तब जाकर उस कोयले से क्लासिकल होमियोपैथिक रेमिडी रूपी बेशकीमती हीरे का टुकड़ा निकलेगा और उस औषधि से वह रोगी अति शीघ्र स्वास्थ्य लाभ करेगा। उस समय मैं बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर से होमियोपैथिक स्नातक की शिक्षा ले रहा था। सेमिनार में मुझे क्लासिकल होमियोपैथी का गुरु मंत्र मिल चुका था । मैं अपने मानस गुरु परम पूज्य डॉ एस.के. दूबे के श्री चरणों में अनन्त कोटि श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ।