MY You Tube CHANNEL


Congratulations to all your friends on Rakshabandhan and Shravani Poornima.
The entire humanity is suffering the terrible pain of corona disease today. Today the common man has become completely confused, he does not understand anything. His livelihood has been snatched away and he and his family are facing the brunt of diseases separately. In such a situation, any benign person should have the same ability to serve society, nation and humanity according to him. This is the point that shook my inner doctor again and again and finally I was forced to choose as much as possible the platform of YouTube for homeopathic medicine and health related counseling to the public which is almost accessible today. Link to my youtube channel in the service of all of you ••

https://youtu.be/V0jtkYS5bFQ

In earnest words, I request you earnestly that you will subscribe, like and share my channel, and if I have got any error then feel free to advise me, which I can correct immediately. Thanks a lot.

मेरा यू ट्यूब चैनल

आप सारे मित्रों को रक्षाबंधन और श्रावणी पूर्णिमा की हार्दिक बधाइयां और कोटिशः अभिनंदन !
संपूर्ण मानवता आज कोरोना रोग की भयानक पीड़ा झेल रही है ।आज आम आदमी एकदम किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया है , उसको कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है । उसकी रोजी-रोटी छिन चुकी है साथ ही वह और उसका परिवार रोगों की मार अलग से झेल रहा है । ऐसे में किसी भी सहृदय व्यक्ति को उसकी जैसी क्षमता है उसके अनुसार समाज , राष्ट्र और मानवता की सेवा करनी चाहिए । बस यही वह बिंदु है जिसने मेरे अंदर के चिकित्सक को बार-बार झकझोरा और अंत में मैं बाध्य होकर जनमानस को यथासंभव होम्योपैथिक चिकित्सा और स्वास्थ्य से संबंधित परामर्श के लिए यूट्यूब का प्लेटफार्म चुना जो आज लगभग सर्व सुलभ है । आप सब की सेवा में मेरे यूट्यूब चैनल का लिंक••

https://youtu.be/V0jtkYS5bFQ

बेबाक शब्दों में आपसे आग्रह पूर्वक निवेदन करूं कि आप मेरे चैनल को अवश्य सब्सक्राइब करेंगे , लाइक और शेयर करेंगे साथ में अगर मुझ से कोई त्रुटि हो गई हो तो बेहिचक मुझे सलाह देंगे जिसे मैं तुरन्त सही कर सकूँ। बहुत-बहुत धन्यवाद ।

अद्भुत अद्वितीय अविस्मरणीय अविश्वसनीय ऐतिहासिक ••••••


राष्ट्र की अखंड दीपशिखा को अपलक निहारते मोदी

5 अप्रैल 2020 दिन रविवार समय रात्रि नौ बजे | अविजित भारत ने इतिहास का एक और सुनहरा और सुंदरतम कालखण्ड जिया , उस नौ मिनटों में ! जिससे एक अकल्पनीय उर्जा का विस्फोट हुआ । जब एक छोटे से आह्वान पर पूरा देश एकजुटता के साथ अपने  अगुवा के साथ खड़ा था और जी रहा था । मानो सब कुछ उस विस्फोटित उर्जा के सामने विवश था हार मानने के लिए। वह नकारात्मकता पल भर के लिये छू मन्तर हो गई जब पिछले ही पल निराशा  में जी रहा पूरा देश एक नई  स्फूर्ति के साथ खड़ा था । उस बार बार अखाड़े में पटखनी खाने वाले  पहलवान की तरह जब उसके अपनों की जबरदस्त  ललकार सुनकर वह , अपने  विरोधी पर काल  बन कर  टूट पड़ता है और अगले ही कुछ पलों में बाजी अपने  नाम कर लेता है। 


   यहाँ हम बात कर रहे हैं उस अदृश्य शत्रु कोरोनावाइरस की जो पिछले कई महीनों से पूरी धरती से ही मानवता को मिटाने पर तुला हुआ है । चाइना और विश्व स्वास्थ्य संगठन की कुटिल दुष्टता का परिणाम पूरी दुनिया भुगत रही है । मानवता कराह रही है और कोई आँसू भी पोंछने वाला नही मिल रहा है। डॉक्टरों को दवाएँ नहीं सूझ रही हैं | मजबूरन अमेरिका में अति गम्भीर रोगियों को टेन्ट में बाहर मरने के लिए छोड़ दिया जा रहा है ये स्थिति आज उस अमेरिका की है जो पूरी दुनीयाँ पर राज करता है और उसकी मर्जी के बिना एक पत्ता तक नहीं हिल सकता । वहां लोगों के मरने के बाद लाशों को प्रशासन ही ठिकाने भी लगा रहा है । परिवार से मुलाकात कौन कहे देखने का भी अधिकार  नहीं है।

ये नागासाकी और हिरोशिमा के परमाणु हमले से भी भयावह और खतरनाक स्थिति है , पूरी मानवता के लिए क्यों कि युद्ध होता है तो शत्रु दिखता है। यहाँ तो शत्रु ही अदृश्य है और मानवता काल कवलित होती जा रही है । पूरी दुनिया पर राज करने वाला अमेरिका आज घुटनों के बल आ गया है | पूरा यूरोप त्राहि त्राहि कर रहा है , जापानियों के आँसू सूख ही नहीं रहे हैं तब तक नयी लाश दरवाजे पर दस्तक दे रही है | फिलीपींस में देखते ही गोली मारने का आदेश है आस्ट्रेलिया और अफ्रीका भी त्राहि त्राहि कर हैं | इटली जो पूरी दुनिया में चिकित्सा व्यवस्था में दुसरे स्थान पर है उसने हाथ खड़ा कर दिया है वहां के प्रधान मंत्री रो रो कर कह रहे हैं की हमारे लोगों को बचाओ ! लेकिन कौन सुन रहा है उनकी | जर्मनी के मंत्री इस महा विपत्ति से दुखी होकर आत्महत्या कर लिए , ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन आई सी यू में हैं , प्रिंस चार्ल्स कोरोना संक्रमित हैं ! जब दुनियां के वी आई पी लोगों का ये हाल है तो आम जनता जिसको रोटी दाल के लिए भी सोचना है उसका क्या हाल होगा इस संकट में , सोच सोच कर ही रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं | क्या हो गया है अपने इस फूलों के गुलदस्ते जैसी  सुन्दर धरती को ?  कहीं ना कहीं इसको चाईना की साम्राज्यवादी नीतियों की नजर लग गई | चाइना की शाजिश और विश्व स्वस्थ्य संगठन की चाइना से मिली भगत आज पूरी दुनियां भुगत रही है |

आज जैसी पूरी दुनियां असमंजस और निराशा में जी रही है वैसा पहले कभी भी देखने को नहीं मिला | ऐसे में ही सामान्य जन किसी अवतार के प्राकट्य की बात करते हैं | यहाँ श्री मदभगवद्गीता का वह श्लोक काफी प्रासंगिक लगता है जब युद्ध क्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं — यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत | अभ्युत्थानामधर्मस्य तदात्मानम सृजाम्यहम || इतिहास हमेशा अपने हिसाब से महापुरुषों का मूल्याङ्कन करता है |

कोरोना घरवास


लाकडाउन में भारतीय पुलिस

जी धन्यवाद ! नमस्कार मित्रों !! क्या हाल-चाल है आपका ? इस घरवास में अपना तो सिर्फ खाना – सोना व्हाट्सएप ,  फेसबुक , गूगल समाचार , टीवी समाचार , रामायण और महाभारत सीरियल , थकने या पीठ दुखने के बाद फिर वही सोने और लेटने का कार्यक्रम , इस  सब में बहुत ही व्यस्त हूं फुर्सत नहीं है आपसे फोन पर भी बात करने के लिए बहुत-बहुत व्यस्त कार्यक्रम है आजकल का। घर से बाहर लक्ष्मण रेखा लांघने में भी बहुत डर लगता है । पता नहीं किधर से कोरोना नामक यमराज धर ले इसलिए घर से बाहर नहीं निकल रहा हूं । कभी – कभार  दवा की आवश्यकता से अगर मेडिकल स्टोर तक का सफर पूरा करना हुआ तो सैन्य वेशभूषा धारण करनी पड़ती है । सबसे पहले नाक और मुंह का बख्तरबंद फिर हाथ में सर्जरी ग्लव्स , सिर पर गमछा , पैर में जूता यानी अगर अपनी ही फोटो खींची जाए तो खुद ही अपने को पहचानना कठिन है , फिर रास्ते चलते 1 मीटर की सोशल डिस्टेंसिंग किसी से कोई बात नहीं । वैसे तो रास्ते में मित्रों के नाम पर सिर्फ कुत्ते , गधे और पुलिस वाले ही मिलते हैं कुत्ते देखते ही भौंकते हुए दूर भागते हैं पुलिस वाले मेडिकल का पर्चा देखने पर गला छोड़ते हैं और आगे बढ़ने पर गर्दभानन्द जी पूँछ हिला कर सिग्नल दे देते हैं कि जब उन दोनों ने पास कर ही दिया तो जाओ यार ! कोई बात नहीं है !!
     किसी तरह मेडिकल स्टोर से दवा लेकर लौटने के बाद घर के दरवाजे पर  फिर अगली दुर्दशा ……   सबसे पहले गमछा खोल कर वहां रखो •••   सावधानी से ग्लब्स को उतारना  ••• सारे कपड़े उतारो ••• और फिर नाक और मुंह का बख्तरबंद सावधानी से उतारो •••  सारे सामान कोने में रखो …… हाथ पैर अच्छी तरह से धुलो  फिर हैंड वाश से  दो बार हाथ रगड़ रगड़ कर धुलो ….. तब जाकर के घर में एंट्री । भैया ! इतनी दुर्दशा सिर्फ उस कोरोना जमराज के कारण ही  हो रही है लगता है जैसे मरघट से लौट रहा हूं ।


     इतने में  गांव से चतुरी काका का फोन आ गया पूछने पर वो भी वही गीत गाने लगे ….. भैया अइसन जीनगी हम कबो नाहीं जियले रहनी , एतना जिनिगी बीत गइल लेकिन अइसन घरबास हम कबो नाहीं कइले रहनी । रोज सुखले – सुखले लिट्टी-चोखा खात – खात मन उबिया गइल बा बाबू ! घर से बाहर निकलही के नईखे ,   बजारे जाही के नईखे , कउनो  महामारी अइल बा ….. लइका कुल बाहर भीतर घुमले से मना कर तान स । कह ताने स , की उ बुढवन के ढेरे धरता   •••   दादा अब जान कइसे बाँची ?  सोच – सोच के परनवाँ फरफरा ता ••••
    एही में  एक दिन जानता कर्फू रहे , एक दिन साँझी के बेरा में ताली , थाली अउर घन्टी बजवने स  आ फिर देख काल्हि अतवार के सुन तानी राती में नौ बजे अपनी – अपनी घरे कुल्ही दिया जरइहें स अब दादा देख हमार का हाल बा ई कुल्ही खाली टीवीए मोबाइल में व्यस्त रहताने स आ हमार दाढी झोंटा बढि गइलबा , भइया   का करीं  ? बेचना हजाम अवते नईखे उहो का करे बेचारा घरवा से निकली …. त ओहू के न कोरोनावा धरी हो    ••••

कोविड-19 महामारी ??? साज़िश ??? या चीन द्वारा पूरी दुनिया पर भयानक जैविक आक्रमण !!


चीन नामक जो देश है वह पूरी दुनिया की मानवता के लिए सिरदर्द है ,समस्या है । कभी वह व्यापार युद्ध करता है, कभी अर्थिक युद्ध करता है , तो कभी वो आमने सामने युद्ध के मैदान में सैन्य युद्ध करता है और कभी वह धौंस युद्ध फिर कभी प्रोपेगण्डा युद्ध करता है जब उसको कहीं से भी पार नहीं मिलता है तब वह जैव युद्ध लड़ता है। वर्तमान में वह पूरी दुनिया से जैव युद्ध की लड़ाई लड़ रहा है और ड्रैगन दुनिया को अपने विष दंत से डंसने को आतुर है।

डब्ल्यूएचओ की 25 मार्च  के अपडेट्स के अनुसार —-

कोरोनावाइरस का कन्फर्म केस 416686

कोरोनावाइरस द्वारा कंफर्म मृत्यु -18589

  कोरोनावाइरस प्रभावित देश  — 197

      चाइना ने पहली बार डब्ल्यूएचओ के राष्ट्रीय कार्यालय में जो चाइना में स्थित है , 31 दिसंबर 2019 को सूचित किया कि बुहान में एक अनजाने कारण से लोगों में न्यूमोनिया हो रहा है और लोग मर रहे हैं ।

इसके ठीक एक माह बाद यानी 30 जनवरी 2020 को डब्ल्यूएचओ ने इसे  वैश्विक महामारी घोषित किया और अन्तर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल लगाया । 


इन 30 दिनों का महत्वपूर्ण समय जो पूरी दुनिया और धरती पर मानवता के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था, को व्यर्थ जाने दिया गया और पूरी दुनिया को उसके हाल पर छोड़ दिया गया ।
   
   डब्ल्यूएचओ और डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेडरोज अधनोम घिब्रेयसस दोनों ही भयानक शक के दायरे में आ गए हैं कि आप तो अन्तर्राष्ट्रीय संस्था थे ? आप तो पूरे विश्व की मानवता की देखरेख के लिए नियुक्त हैं ? न कि आप कोई देश हैं , जिसकी किसी दूसरे देश से दुश्मनी हो । आपका आफिस चाइना में क्या कर रहा था ? कि वहां बहुत पहले से ही लोग इस रोग से मर रहे थे । कोविड -19 सितंबर 2019 से बहुत पहले ही वहाँ प्रथम और द्वितीय चरण पार कर चुका था लोग धड़ाधड़ मर रहे थे , लेकिन चाइना का पिट्ठू डब्ल्यूएचओ मौन साधे रहा जब पानी नाक से ऊपर हो गया तब डब्ल्यूएचओ और चाइना को लगा कि दुनिया हमारी ओर उंगली उठाना चालू कर देगी तो दोनों ने मिलकर इससे  अंतरराष्ट्रीय जगत को सूचित करना जरूरी समझा ।

डॉ ली वेनलियांग

जबकि हकीकत यह है कि इन दोनों के सूचित करने से पहले ही चाइना के दिवंगत दंत चिकित्सक डॉक्टर ली वेन लियांग ने वहां के सोशल मीडिया पर अपने मित्रों और रिश्तेदारों को सूचित कर दिया था कि यह  सार्स जैसा ही कोई भयानक वायरस है जिससे लोग मर रहे हैं और आप लोग सतर्क हो जाएँ !  बहुत-बहुत धन्यवाद है उस दिवंगत दंत चिकित्सक डॉ ली वेन लियांग को जिसने इस भयानक साजिश की जानकारी को लीक कर दिया नहीं तो अभी इसको और कितना भयानक बनाने की मंशा चाइना रखता था सोचकर भी सिहरन हो जाती है । मानवता हमेशा ही आपकी ॠणी रहेगी डॉ ली वेन लियांग !!!
हम आपको कभी भूल नहीं सकते।
       संयुक्त राष्ट्र संघ ने कोविड-19 को दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे भीषण मानवीय त्रासदी करार दिया है । उसने कहा है कि हमारे 70 साल के इतिहास में ऐसी भीषण मानवीय त्रासदी कभी भी नहीं देखी गई।

नोबल कोरोना वायरस से कैसे बचें और क्या करें


कोरोना रोग सामान्य सर्दी , खाँसी , बुखार , नाक बहना , छींक आने से शुरू होता है ।

सांस लेने में परेशानी , गले में खराश , थकान , सुस्ती , अत्यधिक कमजोरी इत्यादि लक्षण भी उसके साथ आ सकते हैं।

बाद में अधिक जटिलता बढ़ने पर न्यूमोनिया , हर्टफेल , किडनी फ़ेल , आँतों में सड़न इत्यादि अनगिनत लक्षण पैदा होने लगता है। 

इसलिए इस जानलेवा रोग से जितना भी बन पड़े बचने का प्रयास करना चाहिए।

कोरोना रोग से बचने का उपाय

विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों ने कोविड-19 से बचाव के लिए बहुत सारे उपाय बताए हैं –

सर्वप्रथम इसका वाइरस श्वसन संस्थान को ही प्रभावित करता है ।इसलिए मुँह पर हमेशा अच्छी क्वालिटी के मास्क N – 92 का प्रयोग करें और एक बार प्रयुक्त मास्क का दुबारा प्रयोग न करें।

श्वसन संस्थान की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें विशेषतया छींकते या खाँसते समय , मुँह पर अच्छी क्वालिटी का मास्क N – 92 का जरूर प्रयोग करें ।

हाथ को साबुन और अल्कोहल मिश्रित जल से अच्छी तरह से रगड़ – रगड़ कर धुलें। अल्कोहल मिश्रित जल में कोविड -19 वाइरस को मारने की अद्भुत क्षमता है।

आँख, नाक और मुँह को स्पर्श करने से भरसक बचें।

अभिवादन करते समय दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते करें और कभी भी किसी से हाथ नहीं मिलाएं ।

खाँसी-बुखार और श्वांस से सम्बंधित तकलीफ़ होने पर तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करें और लापरवाही से बचें ।

मांसाहार से पूर्णतया बचें क्योंकि मांस में अनेकों प्रकार के टाक्सिंस (विषैले पदार्थ) होते हैं ।

कोरोनावाइरस या कोविड-19 लक्षण और बचाव


कोरोना वायरस का इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से लिया गया चित्र

31 दिसंबर 2019 । यह दिन मानव सभ्यता के इतिहास में दर्ज हो गया , जब एक चाइनीज नेत्र चिकित्सक डॉक्टर ली वेन लियांग ने एक नए खतरे से पूरी दुनिया को आगाह किया और बताया कि एक छोटा सा विषाणु पूरी मानव सभ्यता के लिए भयानक खतरा बन गया है । चाइना के हुबेई प्रांत की राजधानी बुहान सिटी नामक शहर इस भयानक विषाणु आक्रमण का पहला ग्रास बना । लाशों पर लाशें गिरने लगी । जब तक चिकित्सा विज्ञानी कुछ समझ पाते बहुत देर हो चुकी थी । पूरी मानव सभ्यता के इतिहास में इस अनजाने वायरस का आक्रमण पहले कभी भी नहीं हुआ था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं कोविड -19

सम्पूर्ण मानवता के स्वास्थ्य पर पैनी निगाह रखने वाली हमारी वैश्विक संस्था , विश्व स्वास्थ्य संगठन का चिन्तित होना स्वाभाविक ही था। अपना दायित्व निभाते हुए आगे बढकर मार्गदर्शन करना प्रारंभ कर दिया। कोरोनावाइरस पर विशेषज्ञों की बैठकें और सेमिनार्स का आयोजन किया। निचोड़ में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जो बातें सुझायीं ,उसके अनुसार 12 फरवरी 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरी दुनिया में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया । चाइना ने जिस बीमारी का नाम नोबेल कोरोनावायरस रखा था उस को संशोधित करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसका नया नामकरण कोविड – 19 कर दिया। कोविड – 19 की व्याख्या इस प्रकार बताया , CO – CORONA , VI – VIRUS , D – DISEASE , 19 -2019 ।

कोरोना शब्द की उत्पत्ति

न्यू कोरोनावाइरस या कोविड -19

कोरोना लैटिन शब्द है जिसका अर्थ मुकुट होता है यानी इस वाइरस की बनावट मुकुट सरीखे होती है । धीरे-धीरे करके यह वायरस पूरी दुनिया में छा गया और पूरी मानव सभ्यता को लीलने की ओर अग्रसर होने लगा ।

कोरोना रोग के लक्षण

सामान्य सर्दी , खाँसी , बुखार , नाक बहना , छींक , सांस लेने में परेशानी , गले में खराश , थकान , सुस्ती , अत्यधिक कमजोरी , न्यूमोनिया , हर्टफेल , किडनी फ़ेल , आँतों में सड़न इत्यादि अनगिनत लक्षण पैदा होने के बाद अन्त में रोगी की मृत्यु और फिर नये रोगी की बारी। इस रोग की खासियत ही यही है कि सामान्य से लक्षणों को लेकर संक्रमित व्यक्ति मौत की ओर बढ़ने लगता है और उपलब्ध सारी चिकित्सा व्यवस्था किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाती है और अन्त में रोगी मौत के मुँह में समा जाता है।

कोविड -19 का आणविक विश्लेषण

जहां चाइना के चिकित्सा विज्ञानी इस बीमारी पर मजबूर हैं और पूरी दुनिया के चिकित्सा शोधकर्ता अनथक परिश्रम करते हुए शोध कर रहे हैं , वहीं हमारे भारतीय चिकित्सा विज्ञानियों ने चाइना से केरल में आए 3 कोरोना ग्रस्त बीमार लोगों को पूर्ण स्वास्थ्य लाभ देकर के एक नई मिसाल पेश की और पूरी दुनिया के सामने भारतीय चिकित्सा विज्ञान का डंका बजा दिया ।

कोरोना रोग ग्रस्त हॉस्पिटल में चिकित्साकर्मी

कोरोनावायरस से बचने के उपाय

विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों ने कोविड-19 से बचाव के लिए बहुत सारे उपाय बताए हैं –

  • सर्वप्रथम इसका वाइरस श्वसन संस्थान को ही प्रभावित करता है ।इसलिए मुँह पर हमेशा अच्छी क्वालिटी के मास्क का प्रयोग करें और एक बार प्रयुक्त मास्क का दुबारा प्रयोग न करें।
  • श्वसन संस्थान की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें विशेषतया छींकते या खाँसते समय ।
  • हाथ को साबुन और अल्कोहल मिश्रित जल से अच्छी तरह से रगड़ – रगड़ कर धुलें। अल्कोहल मिश्रित जल में कोविड -19 वाइरस को मारने की अद्भुत क्षमता है।
  • आँख, नाक और मुँह को स्पर्श करने से भरसक बचें।
  • खाँसी-बुखार और श्वांस से सम्बंधित तकलीफ़ होने पर तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करें और लापरवाही से बचें ।
  • मांसाहार से पूर्णतया बचें क्योंकि यह वाइरस चाईना के मीट मार्केट से ही फैला है ।

पिछले दिनों जब मैं इस ब्लॉग को लिख रहा था ठीक उसी समय चाइना से एक बार फिर एक दुखद समाचार आया कि बुचांग अस्पताल के निदेशक डा0 लिउ झिमिंग की मौत कोरोना वाइरस के संक्रमण से हो गई है। यह असामयिक काल का भयानक ताण्डव दिखाने वाला विषाणु अनगिनत लोगों के साथ ही अभी और कितने चिकित्साकर्मियों का बलिदान लेगा ? यह निरूत्तर प्रश्न अभी भविष्य के गर्भ में ही है ।

कोरोनावायरस और क्लासिकल होम्योपैथी

जनमानस में यह बड़ा यक्ष-प्रश्न है कि क्या होमियोपैथी के पास इसका जवाब है ? उत्तर हाँ में है। कोविड 19 क्या ! ! भविष्य में जितनी भी स्वास्थ्य से सम्बंधित गंभीरतम चुनौतियां आयेंगी होमियोपैथी के पास उसका माकूल जवाब होगा । भारतीय होमियोपैथिक चिकित्सा जगत इसके लिए पूरा पूरा तैयार बैठा है।

क्लासिकल होम्योपैथी और मैं


मैं डॉक्टर सच्चिदानंद श्रीवास्तव अपने वेबसाइट क्लासिकल होम्योपैथी में आपका स्वागत करता हूं।मैं पिछले लगभग 18 साल से क्लासिकल होम्योपैथी का अनवरत प्रयोग और अध्ययन कर रहा हूं। क्लासिकल होम्योपैथी वह होम्योपैथिक प्रैक्टिस है जिसमें चिकित्सक होम्योपैथी के गूढ़ सिद्धांतों का प्रयोग करके अपने रोगी के लिए चुनिंदा औषधि का चुनाव करता है । फरवरी सन् 2002 की घटना है , पटना के प्रसिद्ध अन्तर्राष्ट्रीय होमियोपैथिक चिकित्सक डा0 रामजी सिंह ने एक अन्तर्राष्ट्रीय होमियोपैथिक सेमिनार का आयोजन किया था , उस सेमिनार में मुझे भी जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । सेमिनार में उस समय के तत्कालीन लिविंग हैनीमन डाक्टर एस.के. दूबे का सत्र चल रहा था । सेमिनार में दक्षिण एशिया  के 10 देशों के डॉक्टर्स पधारे हुए थे । डॉक्टर्स ने डॉ. एस.के. दूबे से पूछा कि सर होम्योपैथिक डॉक्टर बहुत गरीब होता है उसे अपनी गरीबी दूर करने के लिए क्या करना चाहिए ? इस प्रश्न पर डॉ. एस.के. दूबे ने डॉक्टरों से कहा कि ….. you are smuggler of diamonds not Homoeopathic Physician……. डा.दूबे की इस बात पर सेमिनार हाल में पूरा सन्नाटा छा गया ,उन्हें बात ही समझ में नहीं आ रही थी कि आखिरकार इसका मतलब क्या हुआ तब डॉ. एस.के. दूबे ने इसको एक्सप्लेन किया और समझाया कि यह जो होम्योपैथी की सफेद- सफेद गोलियां हैं वह सिर्फ शुगर ऑफ मिल्क या मात्र चीनी की गोलियां नहीं है वह एक- एक होमियोपैथी की गोली हीरे के टुकड़े हैं तुमको करना सिर्फ इतना है कि उन हीरे के टुकड़ों को तराशो और उस अनमोल हीरे रूपी होमियोपैथिक रेमिडी को अपने उस रोगी के लिए निकालो जो किसी रोग से ग्रस्त होकर तुम्हारे पास आया है, उसके लिए तुमको अथक परिश्रम करनी पड़ेगी साधना करनी पड़ेगी तब जाकर उस कोयले से क्लासिकल होमियोपैथिक रेमिडी रूपी बेशकीमती हीरे का टुकड़ा निकलेगा और उस औषधि से वह रोगी अति शीघ्र स्वास्थ्य लाभ करेगा। उस समय मैं बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर से होमियोपैथिक स्नातक की शिक्षा ले रहा था। सेमिनार में मुझे क्लासिकल होमियोपैथी का गुरु मंत्र मिल चुका था । मैं अपने मानस गुरु परम पूज्य डॉ एस.के. दूबे के श्री चरणों में अनन्त कोटि श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ।